Mahashivratri 2026 Date, Muhurat, Puja Vidhi
महाशिवरात्रि 2026 की सही तिथि, माघ कृष्ण चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त, निशीथ काल समय और शिव पुराण में वर्णित माता सती से शिव-पार्वती विवाह कथा की संपूर्ण जानकारी। Mahashivratri 2026 date, Magh Krishna Chaturdashi muhurat, Nishith Kaal timing, and Shiv Puran based story of Mata Sati
शिव पुराण के अनुसार, राजा दक्ष की पुत्री माता सती भगवान शिव की अर्धांगिनी थीं। जब राजा दक्ष ने यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया, तब माता सती ने उस अपमान को सहन न करते हुए यज्ञ स्थल पर योगाग्नि द्वारा देह त्याग किया।
इस घटना के बाद भगवान शिव गहन विरक्ति में चले गए। तत्पश्चात माता सती ने ही पर्वतराज हिमालय के यहाँ माता पार्वती के रूप में जन्म लिया। यह वर्णन शिव पुराण में विस्तार से मिलता है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पुनः प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की।
माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। शिव पुराण तथा स्कन्द पुराण में वर्णित है कि देवताओं की उपस्थिति में हिमालय के यहाँ शिव-पार्वती विवाह संपन्न हुआ।
महाशिवरात्रि के संदर्भ में शिव-शक्ति का प्रसंग मुख्य रूप से शिव पुराण में वर्णित है।
शिव पुराण में वर्णित इन प्रसंगों के आधार पर महाशिवरात्रि की रात्रि को शिव-शक्ति के दिव्य मिलन से जोड़ा जाता है। इस दिन व्रत, जप और रात्रि जागरण का विधान बताया गया है।
तिथि और समय (Date and Duration)
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महाशिवरात्रि की तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम ~05:04 बजे
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तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम ~05:34 बजे
इसका मतलब है कि पूरी रात 15–16 फरवरी को महाशिवरात्रि का समय है।
पूजा के शुभ समय (Muhurat)
आप पूजा चार भागों में कर सकते हैं
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प्रथम प्रहर :- शाम 06:01 – रात 09:09 बजे – इस समय नींद से पहले पूजा शुरू कर सकते हैं।
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द्वितीय प्रहर :- रात 09:09 – 00:17 बजे – घर में जलाभिषेक या मंत्र-जप इस दौरान उत्तम रहेगा।
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तृतीय प्रहर :- 00:17 – 03:25 बजे - मध्य रात्रि का भाग (Nishith Kaal) — विशेष समय माना जाता है।
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चतुर्थ प्रहर :- 03:25 – 06:33 बजे – सूर्योदय से पहले अंतिम पूजा कर सकते हैं।
विशेष श्रेष्ठ समय (Best Time)
- मध्य रात्रि का समय (Nishith Kaal) – लगभग 00:00 बजे के आसपास - यह समय पूजा, मंत्र-जप और रुद्राभिषेक के लिए सबसे शुभ है।
व्रत का पारण (Vrat Break Time)
16 फरवरी 2026 की सुबह बाद
पारण का समय सुबह में शुरू होता है (लगभग 07:49 बजे के बाद)
पूजा-विधि (संक्षेप)
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स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
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शिवलिंग पर जल और पंचामृत अर्पित करें
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बेलपत्र चढ़ाएँ
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“ॐ नमः शिवाय” का 108 जप करें
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रात्रि में जागरण रखें
व्रत नियम
✔ सात्विक आहार
✔ संयम और जप
✔ क्रोध से दूर रहें
घर पर विधि-विधान से पूजा
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