मुंडन मुहूर्त 2026: शुभ तिथियां, नक्षत्र, नियम एवं संस्कृति
वर्ष 2026 में मुंडन संस्कार (चूड़ाकर्म) के संपूर्ण शुभ मुहूर्त, तिथियां और नक्षत्रों की सूची देखें। Purohit Baba™ के अनुभवी वैदिक आचार्यों से अपने बच्चे के लिए व्यक्तिगत मुहूर्त निकलवाएं।
मुंडन मुहूर्त 2026: शुभ तिथियां व नियम
मुंडन मुहूर्त 2026: हिंदू सनातन परंपरा में 16 संस्कारों में से 'मुंडन संस्कार' (चूड़ाकरण संस्कार) आठवां अति महत्वपूर्ण संस्कार है। बच्चे के जन्म के बाद उसके सिर के पहले बालों को काटना मुंडन कहलाता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त और सही नक्षत्र में मुंडन कराने से बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास उत्तम होता है तथा पिछले जन्मों के पापों व नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।
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मुंडन संस्कार कब करना चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार बच्चे का मुंडन संस्कार उसके **प्रथम वर्ष के अंत में**, **तीसरे**, **पांचवें** या **सातवें वर्ष** में किया जाना अति शुभ माना जाता है। विषम वर्षों (1st, 3rd, 5th, 7th) में ही मुंडन कराना शास्त्र सम्मत है। सम वर्षों में मुंडन कराना वर्जित माना गया है।
वर्ष 2026 में मुंडन हेतु शुभ तिथियां (Mundan Muhurat 2026)
यहाँ वर्ष 2026 के प्रमुख महीनों के अनुसार मुंडन संस्कार की शुभ तिथियाँ दी गई हैं:
| महीना | शुभ तिथि एवं वार | शुभ नक्षत्र |
|---|---|---|
| जनवरी 2026 | 15 जनवरी (गुरुवार), 22 जनवरी (गुरुवार) | रोहिणी, म्रगशिरा |
| फरवरी 2026 | 08 फरवरी (रविवार), 19 फरवरी (गुरुवार) | हस्त, पुष्य |
| मार्च 2026 | 12 मार्च (गुरुवार), 26 मार्च (गुरुवार) | अश्विनी, पुनर्वसु |
| अप्रैल 2026 | 16 अप्रैल (गुरुवार), 27 अप्रैल (सोमवार) | स्वाति, चित्रा |
| मई 2026 | 10 मई (रविवार), 21 मई (गुरुवार) | अनुराधा, रोहिणी |
| जून 2026 | 18 जून (गुरुवार), 25 जून (गुरुवार) | पुष्य, हस्त |
विशेष टिप: मुंडन हमेशा बच्चे के जन्म नक्षत्र और चंद्र स्थिति को ध्यान में रखकर तय किया जाता है। व्यक्तिगत मुहूर्त के लिए पंचांग व पंडित जी की सलाह अवश्य लें।
मुंडन संस्कार के लिए शुभ नक्षत्र एवं तिथियां
मुंडन संस्कार में तिथियों और नक्षत्रों का विशेष ध्यान रखा जाता है:
- शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, पुनर्वसु, चित्रा, स्वाति, श्रवण और अश्विनी नक्षत्र मुंडन के लिए अति श्रेष्ठ माने गए हैं।
- शुभ तिथियां: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथियां अत्यंत शुभ मानी जाती हैं।
- शुभ वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को मुंडन संस्कार करना चाहिए।
मुंडन संस्कार का धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व
1. धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व
मान्यता है कि बच्चा जब मां के गर्भ से जन्म लेता है, तो उसके बालों में पूर्व जन्म के पाप और प्रभाव जुड़े होते हैं। मुंडन कराने से बच्चा पूर्वजन्म के बन्धनों से मुक्त होकर इस जन्म में शुद्ध जीवन की शुरुआत करता है।
2. वैज्ञानिक महत्व
वैज्ञानिक दृष्टि से, जन्म के समय बच्चे के सिर पर मौजूद बाल बहुत पतले और असमान होते हैं। मुंडन कराने के बाद आने वाले बाल घने, मजबूत और सुंदर होते हैं। इसके अलावा मुंडन कराने से सिर की त्वचा पर धूप और हवा लगती है, जिससे विटामिन-डी मिलता है और सिर की गर्मी बाहर निकलती है।
मुंडन संस्कार की संपूर्ण विधि (Step-by-Step)
- शुभ स्थान का चयन: मुंडन का कार्य किसी पवित्र नदी के तट, मंदिर, या घर के आंगन में करें।
- पूजा संकल्प: गणेश जी, कुलदेवी/कुलदेवता और माता सरस्वती का पूजन करें।
- नाई द्वारा मुंडन: बच्चे को मां या पिता की गोद में बैठाकर, पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। नाई नए या शुद्ध उस्तरे से मुंडन करे।
- सिखा (चोटी) छोड़ना: कई परंपराओं में सिर के बीच में थोड़ी शिखा (चोटी) छोड़ी जाती है।
- हल्दी व चंदन का लेप: मुंडन के बाद तुरंत सिर पर ताजी पिसी हल्दी या चंदन का लेप लगाएं। इससे कटे स्थान पर इन्फेक्शन नहीं होता और ठंडक मिलती है।
- बालों का विसर्जन: काटे गए बालों को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करें या मिट्टी में दबा दें।
मुंडन संस्कार में ध्यान रखने योग्य ज़रूरी नियम
- ज्येष्ठ संतान नियम: परिवार के पहले (ज्येष्ठ) बच्चे का मुंडन यदि 5वें वर्ष में हो तो आषाढ़ महीने में नहीं करना चाहिए।
- माता के गर्भ काल का नियम: यदि मां गर्भवती हो तो बच्चे का मुंडन कराने से बचना चाहिए।
- राहुकाल व भद्रा: राहुकाल और भद्रा में मुंडन संस्कार पूरी तरह वर्जित है।
- अमावस्या या ग्रहण: अमावस्या या सूर्य/चंद्र ग्रहण के दिन मुंडन न कराएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
मुंडन 1st, 3rd, 5th या 7th वर्ष में करना शुभ माना जाता है।
मुंडन के तुरंत बाद सिर पर हल्दी और चंदन का लेप लगाना अत्यंत शुभ और औषधीय दृष्टि से लाभकारी होता है।
हाँ, सनातन संस्कृति में बालक और बालिका दोनों का ही मुंडन संस्कार किया जाता है।
मुंडन के कटे हुए बालों को गंगा जी या किसी पवित्र नदी में विसर्जित करें अथवा स्वच्छ मिट्टी में दबा दें।
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