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Chhath Puja 2026 Date, Vidhi, Katha in Hindi

Chhath Puja 2026 Date, Vidhi, Katha in Hindi

October 25, 2026

छठ पूजा 2026 की संपूर्ण जानकारी — तिथि, विधि, कथा, महत्व, नियम और मंत्र।और सतनारायण पूजा के लिए पंडित जी बुक करें।

छठ पूजा हिंदू धर्म का एक प्रमुख और प्राचीन लोकपर्व है, जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में प्रचलित है। यह पर्व भगवान सूर्य और छठी मैया की उपासना को समर्पित है। छठ पूजा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें डूबते और उगते दोनों सूर्य की पूजा की जाती है।

📅 छठ पूजा 2026

13 नवंबर 2026 शुक्रवार
अनुष्ठान: नहाय-खाय
मुख्य बात: व्रत का पहला दिन, शुद्ध सात्विक भोजन
14 नवंबर 2026 शनिवार
अनुष्ठान: खरना
मुख्य बात: गुड़ की खीर, बिना नमक की चने की दाल और चावल का प्रसाद, फिर 36 घंटे निर्जला व्रत
15 नवंबर 2026 रविवार
अनुष्ठान: संध्या अर्घ्य
मुख्य बात: डूबते सूर्य को अर्घ्य
16 नवंबर 2026 सोमवार
अनुष्ठान: उषा अर्घ्य
मुख्य बात: उगते सूर्य को अर्घ्य, व्रत समापन

📖 छठ पूजा का इतिहास

छठ पूजा को भारत के सबसे प्राचीन पर्वों में से एक माना जाता है। वेदों में भगवान सूर्य की उपासना का उल्लेख मिलता है — ऋग्वेद में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। मान्यता है कि छठ पूजा की शुरुआत सबसे पहले भगवान राम ने की थी। जब राम, सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे, तो उन्होंने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में सूर्य देव की उपासना की और उन्हें अर्घ्य दिया।

🕉️ छठ पूजा की पौराणिक कथा

छठ पूजा की सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, प्रथम मनु स्वयंभू की पत्नी शतरूपा ने संतान प्राप्ति की इच्छा से सूर्य देव की उपासना की। उन्होंने कठोर तप किया और 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा। मान्यता है कि उनकी इस भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान सूर्य ने उन्हें पुत्र रत्न प्रदान किया। तभी से छठ पूजा की परंपरा चली आ रही है।

🌟 छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा का संबंध सीधे प्रकृति और सूर्य से है। यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। मान्यता है कि छठी मैया संतान की रक्षा करती हैं और भगवान सूर्य आरोग्य, समृद्धि और यश प्रदान करते हैं। यह पर्व 36 घंटे के निर्जला व्रत के साथ संपन्न होता है, जो अपार श्रद्धा और अनुशासन का प्रतीक है।

🕉️ छठ पूजा की चार मुख्य रस्में:
  • नहाय-खाय: व्रत की शुरुआत शुद्ध सात्विक भोजन से
  • खरना: गुड़ की खीर, चने की दाल और चावल के प्रसाद के साथ पूजा
  • संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को अर्घ्य
  • उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य और व्रत का समापन

🪔 छठ पूजा की विधि

  1. नहाय-खाय: घर की सफाई करके स्नान करें। सात्विक भोजन बनाएं और पहला भोग भगवान सूर्य को अर्पित करें।
  2. खरना: शाम को गुड़, चावल और दूध की खीर के साथ-साथ बिना नमक की चने की दाल (सिंधा नमक रहित) और चावल का प्रसाद भी बनाया जाता है। पूजा करके प्रसाद ग्रहण करें और इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
  3. संध्या अर्घ्य: घाटों पर जाकर बांस की डलिया में प्रसाद रखें। डूबते सूर्य को जल, दूध, और दीपक से अर्घ्य दें।
  4. उषा अर्घ्य: अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद पारण (व्रत तोड़ना) करें।

🔱 छठ पूजा के मुख्य मंत्र

  • ॐ सूर्याय नमः — सूर्य देव का मूल मंत्र
  • ॐ घृणिं सूर्याय नमः — सूर्य को प्रसन्न करने का मंत्र
  • ॐ ह्रीं सूर्याय नमः — समृद्धि और आरोग्य के लिए

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Note: यह लेख Purohit Baba™ Research Team द्वारा वैदिक परंपराओं, धार्मिक ग्रंथों एवं सामान्य पूजा पद्धतियों के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। सामान्य जानकारी मार्गदर्शन के उद्देश्य से दी गई है। यदि आप अपनी आवश्यकता के अनुसार शास्त्रसम्मत एवं व्यक्तिगत परामर्श चाहते हैं, तो हमारे अनुभवी वैदिक आचार्यों से संपर्क कर सकते हैं।
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